उल्लू वाणी

हम आपको उल्लू बनाते है…सच में .बन कर देखिये कितना मजा आता है!

जैसे जैसे आई पी एल में क्रिकेट का खेल अपने अंतिम चरण पर पहुँच रहा है वैसे वैसे उसमे नए नए विवाद और किस्से जुड़ते जा रहे है. अब आई पी एल सिर्फ एक क्रिकेट का खेल नहीं रहा गया है , इसमें राजनीति से लेकर घोटालों तक  का तडका लग चुका है….क्रिकेट तो सिर्फ आई पी एल का एक हिस्सा बन गया है. क्रिकेट तो सिर्फ २ महीने चलेगा बाकी का आई पी एल इससे जुड़े घपले, विवाद और राजनीति के कारण सालभर तरो ताज़ा बना रहेगा. यानि के आई पी एल एक बारह मासी किस्सा बन गया है. टी वी चैनलों को भी एक नियमित समाचार का स्रोत मिल गया है. जब और कोई समाचार न हो तो कोई भी आई पी एल से जुडी खबरे चलाते रहिये टी आर पी बनी रहेगी…अरे भाई आई पी एल जो है!!!

वैसे भारत में हरित क्रांति की शुरुआत १९६६-६७ में हुई थी और भारत खाद्दान की दिशा में आत्मनिर्भर होने की और अग्रसर होने लगा. परन्तु दुःख की बात है की अभी तक हम इस मामले में आत्मनिर्भर नहीं हुए है. आज कोई अपने बच्चे को किसान नहीं बनाना चाहता और जो किसान है वो भी अपना खेती का पेशा छोड़ रहे है…ऐसे में यह एक चिंता का विषय है.

पर कहते हैं ना हर समस्या का एक समाधान होता ही है..बस तो हमे भी अब चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है.

जो काम हमारी सरकारें वर्षों से नहीं कर सकी वो काम इन्टरनेट के अविष्कार ने कर दिया. सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद खेती करना किसी ने अपनी इच्छा से नहीं अपनाया वहीँ आजकल इन्टरनेट पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे  फार्म विल्ली और आईबीबो  फार्म ने कर दिखाया है. इनकी लोकप्रियता का आलम यह है की बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ कर इस खेती के खेल में व्यस्त रहते है.

सरकार बच्चों के इस शौक से बहुत उत्साहित है कि आने वाली पीढ़ी अब खेती बाड़ी में रूचि लेने लगी है.

हमारे पत्रकार उल्लू के पठ्ठे को कुछ बच्चों ने जो कि कंप्यूटर पर खेती बाड़ी के दीवाने हैं, बताया कि उन्हें इसमें इतना मजा आता है कि वो बड़े होकर डॉक्टर या इंजीनियर बनने कि नहीं बल्कि किसान बनने कि इच्छा रखते हैं. वैसे बच्चों और बड़े जो भी इस खेती बाड़ी के खेल में व्यस्त रहते है उनका मुख्य उद्शेय सिर्फ अधिक से अधिक अंक जुटाने का होता है…बहरहाल जो भी हो…किसी न किसी रूप में हमारा झुकाव खेती कि और तो हुआ और क्या पता आगे चल कर यही कंप्यूटर कि खेती बाड़ी  कंप्यूटर से बाहर आकर एक नयी  हरित क्रांति बन जाये.

जी हाँ ..हमारे पत्रकार उल्लू के पठ्ठे  ने खबर दी है कि शोएब -सानिया कहानी में एक नया मोड़ आ गया है….

शोएब का पाकिस्तानी पासपोर्ट अभी भी भारतीय अदालात में जमा है और जैसा कि उनकी शादी  भारतीय टेनिस खिलाड़ी  सानिया मिर्ज़ा से हो चुकी है, इसी सुनहरे मोके का फ़ायदा उठाने के लिए उन्होंने भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सभी को चौंका दिया है.

वैसे इसके पीछे शोएब कि मंशा आई पी एल में हिस्सा लेने कि बतायी जा रही है जैसा कि आई पी एल की बोली में किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी कि खरीद फ़रोख्त  नहीं हुई थी अतः उन्होंने इस स्वर्णिम अवसर का फ़ायदा उठाने के लिए यह कदम उठाया है.

जहाँ पाकिस्तान में इस कदम को लेकर निराशा का माहोल है कि सानिया भाभी अब पाकिस्तान नहीं आएँगी वहीँ भारत में मिली जुली प्रतिक्रिया  व्यक्त की गयी है, शिव सेना इसका विरोध कर रही है जबकि कुछ आई पी एल टीमों के मालिकों की नज़र शोएब पर जा टिकी है और उनकी कीमत का अंदाजा लगाया जा रहा है..!!

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